कानपुर न्यूज डेस्क: कानपुर में 1991 के कथित फर्जी एनकाउंटर के मामले में 12 रिटायर्ड पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। सीबी-सीआईडी की जांच में सामने आया कि एनकाउंटर की कहानी कथित तौर पर मनगढ़ंत थी और गिरफ्तार किए गए 12 लोगों के खिलाफ झूठे सबूत तैयार किए गए थे। इस मामले में उस समय के थाना प्रभारी विद्यासागर त्रिपाठी और जांच अधिकारी रमेश चंद्र भटोले समेत 18 पुलिसकर्मियों के नाम जांच में सामने आए हैं। इनमें से छह की मौत हो चुकी है।
करीब 35 साल बाद शनिवार को महाराजपुर थाने में सीबी-सीआईडी इंस्पेक्टर सुशील कुमार की शिकायत पर एफआईआर दर्ज की गई। आरोपियों के खिलाफ सबूत गढ़ने, झूठे आरोप लगाने, गलत तरीके से हिरासत में रखने और चोट पहुंचाने समेत भारतीय दंड संहिता की अलग-अलग धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। डीसीपी (ईस्ट) सत्यजीत गुप्ता ने एफआईआर दर्ज होने की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि सीबी-सीआईडी मामले की आगे जांच करेगी।
पुलिस ने दावा किया था कि 23 अगस्त 1991 को नरवल मोड़ पर कुछ लोगों ने पेड़ों की डालियां डालकर सड़क रोक दी थीं और डीसीएम ट्रक लूटने की कोशिश कर रहे थे। पुलिस के मुताबिक, मौके पर पहुंची टीम का उनसे सामना हुआ और 12 लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। पुलिस ने उस समय उनके पास से देसी तमंचे, कारतूस और बम मिलने का दावा भी किया था। बाद में गांधीनगर, चकेरी निवासी देव प्रसाद पाठक ने सरकार से शिकायत की। उनका आरोप था कि तत्कालीन थाना प्रभारी त्रिपाठी ने उनसे एक प्लॉट मुफ्त में देने की मांग की थी। इनकार करने पर उन्होंने पाठक के छोटे भाई राकेश और उसके साथियों को फंसाने के लिए कथित तौर पर फर्जी एनकाउंटर की कहानी बनाई।
जांच के दौरान ट्रक चालक उमाशंकर और क्लीनर बृजेंद्र सिंह ने बताया कि वे कानपुर से वाराणसी साबुन लेकर जा रहे थे। रास्ते में रामादेवी चौराहे पर एक सिपाही और कुछ अन्य लोग जबरन उनके ट्रक में चढ़ गए। इसके बाद उन्हें थाने ले जाया गया और उनसे खाली कागजों पर हस्ताक्षर कराए गए। पुलिस ने बाद में गिरफ्तार लोगों के खिलाफ डकैती की तैयारी, डकैती के लिए इकट्ठा होने और हत्या की कोशिश से जुड़ी धाराओं के साथ आर्म्स एक्ट और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम के तहत आरोपपत्र दाखिल किया था। सीबी-सीआईडी की जांच में सामने आया कि इन लोगों को कथित तौर पर उनके घरों से सोते समय उठाया गया था और उनके परिवार के सदस्यों के लाइसेंसी हथियारों को ही उनसे बरामद हथियार दिखा दिया गया था।