भारतीय पौराणिक कथाओं को नए अंदाज में पेश करने वाली किताबों की दुनिया में सत्यम श्रीवास्तव की ‘द फॉलन गॉड’ तेजी से चर्चा बटोर रही है। यह किताब उनकी ‘देव-असुर कथा ट्रिलॉजी’ का दूसरा पार्ट है, जो पहली किताब ‘द वील्डर ऑफ द त्रिशूल’ की कहानी को आगे बढ़ाती है। हालांकि यह सिर्फ अगला अध्याय नहीं है, बल्कि एक ऐसे विशाल फैंटेसी संसार का विस्तार है, जहां सत्ता, युद्ध और आस्था लगातार टकराते नजर आते हैं।
कहानी ध्रुव-लोक नाम की एक काल्पनिक दुनिया में आधारित है, जहां पौराणिक तत्वों को पारंपरिक धार्मिक दृष्टिकोण से नहीं, बल्कि राजनीति और संघर्ष के नजरिए से दिखाया गया है। यहां राज्य टूटते हैं, गठबंधन बदलते हैं और दिव्य अस्त्र सिर्फ पूजा की वस्तु नहीं, बल्कि शक्ति और विनाश के प्रतीक बन जाते हैं। यही कारण है कि किताब की दुनिया लगातार अस्थिर और रहस्यमयी बनी रहती है।
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