कानपुर न्यूज डेस्क: कानपुर में नशे का अवैध कारोबार लगातार बढ़ता जा रहा है। कोचिंग हब, पॉश कॉलोनियों से लेकर बस्तियों तक ड्रग्स का नेटवर्क फैल चुका है। गांजा, चरस, स्मैक से लेकर महंगे सिंथेटिक ड्रग्स एलएसडी तक की तस्करी के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। पुलिस कार्रवाई कर रही है, लेकिन नशे के सौदागर बार-बार अपना नेटवर्क खड़ा कर ले रहे हैं।
पिछले एक महीने में पुलिस ने करीब 1,500 किलो गांजा बरामद किया है। इसके अलावा चरस, स्मैक और एलएसडी की खेप भी पकड़ी गई है। बावजूद इसके शहर में ड्रग्स की सप्लाई पूरी तरह नहीं रुक सकी है। छह महीने पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नशे के खिलाफ सख्त अभियान चलाने के निर्देश दिए थे, लेकिन इसका स्थायी असर अब तक दिखाई नहीं दिया है।
कमिश्नरेट व्यवस्था लागू होने के बाद तत्कालीन एडिशनल डीसीपी क्राइम दीपक भूकर ने कई बड़े ड्रग तस्करों पर कार्रवाई की थी। उस दौरान काकादेव के चर्चित तस्कर सुशील बच्चा समेत कई आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था। पुलिस ने उसके मकान पर बुलडोजर जैसी कार्रवाई भी की थी, लेकिन जेल से बाहर आने के बाद उसके फिर से सक्रिय होने की बात सामने आ रही है।
शहर के काकादेव, किदवई नगर, बर्रा, कल्याणपुर, चकेरी, कलक्टरगंज, हनुमंत विहार और नौबस्ता ऐसे इलाके हैं, जहां समय-समय पर नशे की तस्करी के मामले सामने आते रहे हैं। वहीं, कजड़नपुरवा और सीटीएस बस्ती में भी अवैध नशे का कारोबार लंबे समय से चिंता का विषय बना हुआ है। पुलिस कार्रवाई के बाद कुछ दिनों तक कारोबार ठप रहता है, लेकिन फिर दोबारा शुरू हो जाता है।
हाल ही में एनआरआई सिटी क्लब में आयोजित एक पार्टी पर पुलिस की छापेमारी में एलएसडी, चरस, गांजा और शराब बरामद हुई थी। इस मामले में दो लोगों को गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद पुलिस ने पॉश इलाकों, कैफे और शिक्षण संस्थानों के आसपास निगरानी बढ़ा दी। ऑपरेशन व्हाइट पाउडर के तहत संवेदनशील क्षेत्रों और शैक्षणिक संस्थानों के आसपास लगातार अभियान चलाया जा रहा है।