कानपुर न्यूज डेस्क: कानपुर के कारोबारी विनीत मिनोचा की हत्या के मामले में 21 दिन जेल में रहने के बाद शालू मिनोचा बाहर आ गई हैं। कोर्ट से जमानत मिलने के बाद शालू ने कहा कि उन्हें बिल्कुल अंदाजा नहीं था कि उनके पति सुब्रत मिनोचा अपने पिता की हत्या की योजना बना रहे थे। पुलिस ने शुरुआत में शालू को मामले में आरोपी बनाया था, लेकिन बाद की जांच में उनके पति सुब्रत की गिरफ्तारी हुई।
शालू ने आजतक से बातचीत में बताया कि हत्या वाले दिन वह अपने पति के साथ एक पार्टी में थीं और उस दौरान उन्हें सुब्रत के व्यवहार में कुछ भी असामान्य नहीं लगा। उनका कहना है कि सुब्रत और उनके पिता के रिश्ते अच्छे नहीं थे और पति काफी बातें उनसे छिपाकर रखते थे, लेकिन उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि विवाद इतना बढ़ जाएगा कि बात हत्या तक पहुंच जाएगी। विनीत मिनोचा 5 सितंबर को कानपुर के इंदिरा नगर स्थित अपने फ्लैट में गले पर चोट के साथ मृत मिले थे।
शालू को शुरुआत में पुलिस ने इस शक में गिरफ्तार किया था कि उन्होंने अपने ससुर की हत्या के लिए दो लोगों को सुपारी दी थी। बाद में पुलिस की जांच में दावा किया गया कि सुब्रत ने हत्या के आरोप में शामिल लोगों से शालू का नाम लेने के लिए कहा था। पुलिस के मुताबिक, हत्या में शामिल बताए जा रहे विशाल गौतम ने पहले शालू पर आरोप लगाया था, लेकिन जांच में सामने आया कि घर की डुप्लीकेट चाबी बनवाने की व्यवस्था सुब्रत ने की थी। कोर्ट ने शालू को 50 हजार रुपये के निजी मुचलके पर रिहा करते हुए कहा कि उन्हें साजिश से जोड़ने वाला स्वतंत्र और विश्वसनीय सबूत सामने नहीं आया।
रिहाई के बाद शालू ने कहा कि वह फिलहाल अपने पति के साथ रिश्ते को लेकर कोई फैसला लेने की स्थिति में नहीं हैं और उन्हें इस पूरी घटना से उबरने के लिए समय चाहिए। उनकी सबसे बड़ी चिंता अपने छह साल के बच्चे को लेकर है, जिसे वह इस मामले से दूर रखना चाहती हैं। शालू ने विशाल गौतम से किसी साजिश के तहत संपर्क की बात से भी इनकार किया और कहा कि पार्टी के दिन उन्होंने उससे सिर्फ रंगोली के लिए फूल लाने को कहा था। वहीं पुलिस अब सुब्रत और दूसरे लोगों के बयानों की जांच कॉल रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज और घटना वाले दिन उनकी गतिविधियों से कर रही है।