कानपुर न्यूज डेस्क: कक्षा 12 की पढ़ाई पूरी करने से पहले नौकरी मिलना आम बात नहीं है, लेकिन दुबई में पढ़ने वाले 16 वर्षीय रायलेन अनिल ने अपनी साइबर सिक्योरिटी स्किल्स से यह मुकाम हासिल किया है। जून में उन्होंने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के NEET री-एग्जामिनेशन पोर्टल और IIT रुड़की द्वारा मैनेज किए जा रहे JEE Advanced की वेबसाइट में सुरक्षा खामियां खोजीं। उनकी रिपोर्ट के बाद दोनों जगहों पर जरूरी सुधार किए गए। इसके कुछ ही हफ्तों बाद IIT कानपुर ने उन्हें अपने साइबर सिक्योरिटी इनोवेशन हब C3iHub में जूनियर साइबर सिक्योरिटी इंजीनियर के तौर पर काम करने का ऑफर दिया।
रायलेन को 1 जुलाई को ऑफर लेटर मिला और करीब एक महीने पहले उन्होंने काम शुरू किया। वह फिलहाल कक्षा 12 में पढ़ रहे हैं और दुबई से रिमोट तरीके से बतौर कंसल्टेंट काम कर रहे हैं। IIT कानपुर के निदेशक मनींद्र अग्रवाल के मुताबिक, 16 साल की उम्र में रायलेन IIT से जुड़ने वाले सबसे कम उम्र के व्यक्ति हैं। नाबालिग होने के कारण उनकी नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी करने में करीब एक महीने का समय लगा। उनके पिता अनिल अब्राहम ने अभिभावक के तौर पर कॉन्ट्रैक्ट साइन किया है। रायलेन का काम मुख्य रूप से अलग-अलग वेब पोर्टल की सिक्योरिटी का विश्लेषण करना है।
रायलेन ने जून के पहले हफ्ते में NEET-UG री-एग्जामिनेशन पोर्टल में ऐसी खामी पकड़ी थी, जिससे ऑथेंटिकेशन को बायपास कर सुपर एडमिन के लिए उपलब्ध कुछ सुविधाओं तक पहुंच संभव थी। उन्होंने उचित चैनलों के जरिए इसकी जानकारी CERT-In समेत संबंधित अधिकारियों को दी और करीब एक दिन में समस्या को ठीक कर दिया गया। इसके बाद उन्होंने JEE Advanced पोर्टल से जुड़े क्लाउड स्टोरेज में भी गलत कॉन्फिगरेशन का पता लगाया, जिससे एडमिट कार्ड और रिजल्ट जैसे उम्मीदवारों के दस्तावेज अनधिकृत तरीके से एक्सेस किए जा सकते थे। IIT रुड़की ने तुरंत इसे ठीक किया और स्पष्ट किया कि स्टोरेज सिर्फ पढ़ने के लिए था, इसलिए डेटा में बदलाव या उसे डिलीट करना संभव नहीं था। रायलेन का कहना है कि वह किसी खामी की पुष्टि के लिए जितना जरूरी हो, उतना ही एक्सेस लेते हैं और संवेदनशील डेटा को बेवजह डाउनलोड या स्टोर नहीं करते।
केरल के तिरुवल्ला के पास मन्नार से ताल्लुक रखने वाले रायलेन का जन्म और पालन-पोषण दुबई में हुआ है। उन्हें बचपन से ही हैकिंग में दिलचस्पी थी और कक्षा 8 में उन्होंने गंभीरता से कोडिंग सीखना शुरू किया। कक्षा 10 में उन्होंने पहली बार एक वेबसाइट की सिक्योरिटी खामी खोजकर जिम्मेदारी से रिपोर्ट की थी। अब C3iHub में वह वल्नरेबिलिटी रिसर्च, थ्रेट एनालिसिस, एप्लिकेशन और इंफ्रास्ट्रक्चर सिक्योरिटी के साथ AI और साइबर सिक्योरिटी पर काम करना चाहते हैं। पढ़ाई के बाद उनका लक्ष्य साइबर सिक्योरिटी से जुड़े क्षेत्र में आगे बढ़ना और भविष्य में CISO या CTO बनना है।