कानपुर न्यूज डेस्क: बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) द्वारा आयोजित शिक्षक भर्ती परीक्षा के चौथे चरण (TRE-4) की घोषणा के साथ ही राज्य का राजनीतिक और प्रशासनिक माहौल एक बार फिर गरमा गया है। आयोग द्वारा 32,388 पदों के लिए जारी की गई अधिसूचना के बावजूद, पटना के गर्दनीबाग में शिक्षक अभ्यर्थियों का विरोध प्रदर्शन थमने का नाम नहीं ले रहा है। अभ्यर्थियों का तर्क है कि बार-बार परीक्षा के पैटर्न में बदलाव करने और पिछले चरणों के लंबित पड़े पूरक परिणामों (Supplementary Results) को जारी न करने से लाखों युवाओं का भविष्य अंधकार में लटक गया है।
इस बार का आंदोलन केवल अभ्यर्थियों तक सीमित न रहकर व्यापक राजनीतिक आकार ले चुका है। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के नेता और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव समेत अन्य विपक्षी नेताओं ने खुलकर प्रदर्शनकारियों का समर्थन किया है। विपक्ष का आरोप है कि राज्य सरकार युवाओं के रोजगार और करियर जैसे गंभीर मुद्दों को प्रशासनिक देरी और जटिल नियमों में उलझा रही है। वहीं, पड़ोसी राज्य झारखंड में भी JSSC-CGL परीक्षा में धांधली के खिलाफ चले लंबे आंदोलन और छात्रों के अनशन के बाद सरकार को कई परीक्षाएं रद्द करनी पड़ी हैं, जिसने पूरे क्षेत्र में छात्र राजनीति को और अधिक सक्रिय कर दिया है।
शिक्षक अभ्यर्थियों की सबसे प्रमुख मांगों में से एक बिहार में पुनः 'डोमिसिल नीति' को सख्ती से लागू करना है। अभ्यर्थियों का कहना है कि बाहरी राज्यों के अभ्यर्थियों को सामान्य श्रेणी में बिना किसी सीमा के अवसर मिलने से स्थानीय युवाओं के अधिकार प्रभावित हो रहे हैं। इसके अलावा, अभ्यर्थी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए दो-स्तरीय परीक्षा के बजाय सिंगल-टियर परीक्षा आयोजित कराने की मांग कर रहे हैं, ताकि पूर्व में TRE-3 के दौरान हुए प्रश्नपत्र लीक जैसे घोटालों और परीक्षा रद्द होने जैसी स्थितियों से बचा जा सके।
1 सितंबर से आवेदन प्रक्रिया शुरू होने के बावजूद अभ्यर्थियों का रुख सख्त बना हुआ है, जिससे यह स्पष्ट है कि भर्ती प्रक्रिया को बिना किसी नए विवाद या कानूनी अड़चन के पूरा करना प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती होगी। अभ्यर्थी स्पष्ट कर चुके हैं कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस आश्वासन और सकारात्मक बदलाव नहीं किए जाते, तब तक गर्दनीबाग से लेकर सड़कों तक उनका लोकतांत्रिक विरोध जारी रहेगा।