कानपुर न्यूज डेस्क: विशाखापत्तनम के तट से लेकर आईआईटी कानपुर और फिर अमेरिका के कैलिफोर्निया में एप्पल के बड़े कैंपस तक का सफर प्रणीता पुजारी ने अपनी जिज्ञासा के दम पर तय किया। उनके मन में हमेशा यह जानने की इच्छा रही कि दुनिया में करियर के कितने रास्ते हैं और वह क्या-क्या कर सकती हैं। इसी जिज्ञासा ने उन्हें एक बड़ी टेक कंपनी में काम करने का मौका दिया। लेकिन बाद में उन्होंने अपनी अच्छी-खासी नौकरी छोड़कर यूनिकह्यूमन नाम का एआई हेल्थ स्टार्टअप शुरू किया। इस प्लेटफॉर्म का मकसद लंबे समय से बीमारियों से जूझ रहे लोगों को एआई की मदद से अपनी सेहत समझने और सही समय पर इलाज की दिशा में कदम उठाने में मदद करना है।
प्रणीता बताती हैं कि बचपन से ही उनके मन में अलग-अलग करियर और दुनिया में मौजूद मौकों को लेकर कई सवाल थे। उन्हें लगा कि आईआईटी में पढ़ाई करने से उन्हें इन सवालों के जवाब मिलेंगे और नए अनुभव हासिल करने का मौका मिलेगा। उन्होंने आईआईटी कानपुर से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की, लेकिन वहां का सफर आसान नहीं था। वह अपनी 101 छात्रों की क्लास में अकेली लड़की थीं। उनके मुताबिक, इस अनुभव ने आगे के करियर की भी एक झलक दे दी, जहां उन्हें कई बार खुद को साबित करना पड़ा और अपनी जगह बनानी पड़ी। पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने फ्लिपकार्ट में काम किया और तीन साल बाद एमबीए करने के लिए अमेरिका चली गईं। साल 2019 में उन्हें एप्पल में नौकरी मिली। वहां छह साल के दौरान उन्होंने चार अलग-अलग भूमिकाओं में काम किया। शुरुआत में वह एक्सेसरीज की प्रोडक्ट प्लानिंग से जुड़ीं, फिर आईफोन और बाद में दुनियाभर में एप्पल वॉच की प्रोडक्ट प्लानिंग की जिम्मेदारी संभाली।
एप्पल में काम करते हुए प्रणीता ने सीखा कि किसी प्रोडक्ट को सफल बनाने के लिए हर छोटी-बड़ी बात पर ध्यान देना जरूरी है। उनके मुताबिक, कंपनी अपने प्रोडक्ट और ग्राहकों का भरोसा बनाने के मामले में कोई भी चीज किस्मत पर नहीं छोड़ती। खासकर यूजर्स की निजी जानकारी और हेल्थ डेटा की सुरक्षा को लेकर एप्पल का तरीका उनके लिए सीखने वाला रहा। उन्होंने यह भी देखा कि कंपनी के कुछ कर्मचारियों को एक ऐप के जरिए डॉक्टरों की सुविधा मिलती है और उनकी हेल्थ से जुड़ी जानकारी एक जगह उपलब्ध होती है। उन्हें महसूस हुआ कि इस तरह की सुविधा दुनिया के हर व्यक्ति को नहीं मिलती। इसी सोच के साथ अपनी मां की सेहत से जुड़ा अनुभव भी उनके लिए अहम बन गया। उनकी मां कई सालों से पुराने दर्द की समस्या से जूझ रही हैं। काम के कारण घर से दूर रहने वाली प्रणीता के लिए मां की देखभाल करना और उनकी बीमारी के जवाब तलाशना मुश्किल था। उन्हें इस बात का अफसोस भी हुआ कि सही जानकारी और समय पर मदद न मिलने से उनकी मां को काफी परेशानी झेलनी पड़ी।
इसी अनुभव से यूनिकह्यूमन बनाने का विचार आया। यह आईफोन पर उपलब्ध एक ऐप है, जिसमें ‘निक’ नाम का एआई असिस्टेंट है। यूजर की अनुमति मिलने पर यह उनके स्मार्टवॉच, फिटनेस बैंड, रिंग, मेडिकल रिकॉर्ड, लैब रिपोर्ट और लक्षणों से जुड़ी जानकारी को देख सकता है। इसके बाद यह डेटा में ऐसे पैटर्न तलाशने की कोशिश करता है, जिनसे बीमारी के बढ़ने या लक्षण दोबारा उभरने के संकेत मिल सकते हैं। इसका मकसद सिर्फ फिटनेस ट्रैक करना या किसी एक सवाल का जवाब देना नहीं, बल्कि लंबे समय से बीमारी से जूझ रहे लोगों को उनकी सेहत समझने और आगे क्या करना है, यह तय करने में मदद करना है। यह प्लेटफॉर्म डॉक्टर ढूंढने, अपॉइंटमेंट लेने और इलाज के विकल्प समझने में भी मदद करना चाहता है। फिलहाल यूनिकह्यूमन अमेरिका में उपलब्ध है, जहां मेडिकल रिकॉर्ड और स्वास्थ्य सेवाओं को डिजिटल तरीके से जोड़ना अपेक्षाकृत आसान है। प्रणीता भविष्य में इसे भारत समेत दुनिया के दूसरे देशों तक पहुंचाना चाहती हैं। उनका कहना है कि वह चाहती हैं कि दुनियाभर में उनके अपने लोगों सहित ज्यादा से ज्यादा लोगों को इस तरह की मदद मिल सके।