कानपुर न्यूज डेस्क: भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) कानपुर ने मंगलवार को अपना 59वां दीक्षांत समारोह आयोजित किया, जिसमें कुल 3,104 विद्यार्थियों को स्नातक, स्नातकोत्तर और ई-मास्टर्स कार्यक्रमों की डिग्रियां प्रदान की गईं। इनमें 1,247 स्नातक, 1,325 स्नातकोत्तर और 532 ई-मास्टर्स कार्यक्रम के छात्र शामिल रहे। समारोह के मुख्य अतिथि भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन एवं प्राधिकरण केंद्र (IN-SPACe) के अध्यक्ष, पद्मश्री सम्मानित और आईआईटी कानपुर के पूर्व छात्र डॉ. पवन गोयनका रहे।
इस वर्ष 390 छात्रों को पीएचडी, 502 को एमटेक, 852 को बीटेक, 212 को बीएस, 186 को एमएससी, 59 को एमबीए, 36 को एमडिजाइन, 66 को एमएस (रिसर्च), 107 को ड्यूल डिग्री सहित विभिन्न पाठ्यक्रमों की डिग्रियां दी गईं। दीक्षांत समारोह दो चरणों में आयोजित हुआ। पहले सत्र में मेधावी छात्रों को संस्थान के प्रतिष्ठित पदक और पुरस्कार दिए गए, जबकि दूसरे सत्र में अलग-अलग सभागारों में विद्यार्थियों को औपचारिक रूप से डिग्रियां प्रदान की गईं।
इस बार कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग के छात्र सागर केवी को राष्ट्रपति स्वर्ण पदक से सम्मानित किया गया। वहीं डायरेक्टर स्वर्ण पदक आदित्य वी (बीएस, स्टैटिस्टिक्स एंड डेटा साइंस) और ऋत्विक शंकर (बीटी-एमटी, एयरोस्पेस इंजीनियरिंग) को मिला। इसके अलावा ध्रुव बुधेदेव को रतन स्वरूप मेमोरियल पुरस्कार सहित कई विद्यार्थियों को शैक्षणिक उत्कृष्टता, शोध और नेतृत्व के लिए सम्मानित किया गया।
समारोह में निदेशक प्रो. मणिंद्र अग्रवाल ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि तकनीक लगातार बदलती रहेगी, लेकिन ईमानदारी, सत्यनिष्ठा, विनम्रता, धैर्य और सम्मान जैसे मूल्य हमेशा महत्वपूर्ण रहेंगे। उन्होंने कहा कि आज के दौर में जहां मशीनें कुछ ही सेकंड में जानकारी और समाधान उपलब्ध करा सकती हैं, वहीं इंसानों की असली ताकत सही सवाल पूछने, नैतिक फैसले लेने और तकनीक के सामाजिक प्रभाव को समझने में है। उन्होंने विद्यार्थियों से जीवनभर सीखते रहने और बदलाव के साथ खुद को लगातार विकसित करने का आह्वान किया।