कानपुर न्यूज डेस्क: भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) कानपुर ने 2026-27 शैक्षणिक सत्र से एक नया स्नातक कार्यक्रम बैचलर ऑफ साइबर सिक्योरिटी (बी साइबर) शुरू करने की घोषणा की है। जुलाई से शुरू होने वाले इस चार वर्षीय पाठ्यक्रम में प्रवेश पारंपरिक जेईई एडवांस्ड रैंक के आधार पर नहीं, बल्कि जेईई मेन स्क्रीनिंग, साइबर सिक्योरिटी क्षेत्र में पूर्व कार्य अनुभव और संस्थान परिसर में आयोजित होने वाले हैकाथॉन के प्रदर्शन के आधार पर दिया जाएगा। अधिकारियों के अनुसार, आईआईटी प्रणाली में यह अपनी तरह का पहला कार्यक्रम होगा और इसमें 60 सीटें उपलब्ध रहेंगी।
संस्थान का कहना है कि इस पाठ्यक्रम का उद्देश्य देश के लिए उच्च गुणवत्ता वाले साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ तैयार करना है। कार्यक्रम के तहत छात्रों को पहले दो वर्षों तक आईआईटी कानपुर में साइबर सिक्योरिटी की मजबूत सैद्धांतिक शिक्षा और प्रयोगशाला आधारित प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके बाद अगले दो वर्षों तक विभिन्न सरकारी सुरक्षा संगठनों में इंटर्नशिप कराई जाएगी, जहां छात्र वास्तविक साइबर सुरक्षा चुनौतियों पर काम करेंगे।
आईआईटी कानपुर के निदेशक प्रोफेसर मनींद्र अग्रवाल ने कहा कि भविष्य के संघर्ष केवल भौतिक दुनिया में नहीं, बल्कि साइबर स्पेस में भी लड़े जाएंगे। ऐसे में देश के महत्वपूर्ण डिजिटल ढांचे को साइबर हमलों से सुरक्षित रखने के लिए प्रशिक्षित विशेषज्ञों की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि कई प्रतिभाशाली युवा साइबर सिक्योरिटी में इतनी गहरी रुचि रखते हैं कि पारंपरिक पढ़ाई में उनका प्रदर्शन प्रभावित हो जाता है, जिसके कारण वे जेईई एडवांस्ड जैसी परीक्षाओं में सफलता नहीं पा पाते। यह कार्यक्रम ऐसे ही युवाओं को अवसर देने के उद्देश्य से तैयार किया गया है।
संस्थान जुलाई के पहले सप्ताह में एक विशेष हैकाथॉन आयोजित करेगा, जिसके जरिए प्रतिभाशाली उम्मीदवारों का चयन किया जाएगा। हाल ही में आईआईटी कानपुर ने साइबर सुरक्षा क्षेत्र में असाधारण प्रतिभा दिखाने वाले 19 वर्षीय निसर्ग अधिकारी को भी अपने टेक्नोलॉजी इनोवेशन हब C3iHub में नियुक्त किया है। यह नया कार्यक्रम संस्थान के वाधवानी स्कूल ऑफ एआई एंड इंटेलिजेंट सिस्टम्स द्वारा संचालित किया जाएगा। संस्थान जल्द ही इस कार्यक्रम और आवेदन प्रक्रिया से जुड़ी विस्तृत जानकारी के लिए एक समर्पित वेबसाइट भी लॉन्च करने जा रहा है।