कानपुर न्यूज डेस्क: आईआईटी कानपुर के शोधकर्ताओं ने मंगलवार को दावा किया कि E20 पेट्रोल के इस्तेमाल से वाहनों के माइलेज में कोई बड़ी गिरावट नहीं आती और न ही इससे इंजन को नुकसान पहुंचने के कोई वैज्ञानिक प्रमाण मिले हैं। संस्थान का कहना है कि यह निष्कर्ष नए और पुराने दोनों तरह के वाहनों पर किए गए परीक्षणों के आधार पर सामने आया है।
यह दावा पेट्रोलियम मंत्रालय की हालिया सफाई के बाद आया है, जिसमें कहा गया था कि कुछ वाहनों में E20 पेट्रोल के कारण माइलेज में अधिकतम 5 फीसदी तक की कमी आ सकती है। हालांकि मंत्रालय ने यह भी कहा था कि कम कार्बन उत्सर्जन जैसे इसके फायदे इस मामूली असर से कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण हैं।
आईआईटी कानपुर के मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग की इंजन रिसर्च लैब के प्रोजेक्ट साइंटिस्ट ध्रुव राज कराना ने बताया कि संस्थान के अध्ययन में E20 पेट्रोल से माइलेज में वास्तविक कमी 5 फीसदी से भी कम पाई गई। उन्होंने कहा कि इतनी छोटी गिरावट सड़क की स्थिति, ड्राइविंग स्टाइल या अन्य बाहरी कारणों से भी हो सकती है। यहां तक कि शुद्ध पेट्रोल के साथ लगातार किए गए परीक्षणों में भी ऐसे अंतर देखने को मिलते हैं।
कराना ने कहा कि विस्तृत परीक्षणों में यह भी साबित हुआ कि E20 से इंजन, फ्यूल सिस्टम या अन्य पुर्जों को कोई नुकसान नहीं होता। उन्होंने सोशल मीडिया पर E20 को लेकर फैलाए जा रहे दावों को वैज्ञानिक आधारहीन बताया और लोगों से वाहन निर्माता की गाइडलाइन तथा पेट्रोलियम मंत्रालय की सलाह पर भरोसा करने की अपील की।
उन्होंने बताया कि प्रोफेसर अविनाश कुमार अग्रवाल के नेतृत्व में आईआईटी कानपुर की इंजन रिसर्च लैब लंबे समय से एथेनॉल मिश्रित ईंधन पर शोध कर रही है। लैब ने E85 ईंधन (85 फीसदी एथेनॉल) का भी सफल परीक्षण किया है, हालांकि उसके लिए विशेष रूप से डिजाइन किए गए इंजन और फ्यूल सिस्टम की जरूरत होती है।
शोधकर्ताओं के मुताबिक, वाहन का माइलेज ईंधन की तुलना में ड्राइविंग आदत, सड़क की स्थिति और वाहन के रखरखाव से ज्यादा प्रभावित होता है। वहीं पेट्रोलियम मंत्रालय ने भी अपने सवाल-जवाब दस्तावेज में कहा है कि E20, E10 और सामान्य पेट्रोल की तुलना में अधिक स्वच्छ, बेहतर गुणवत्ता वाला और अधिक प्रभावी ईंधन है, जिसे वर्षों के वैज्ञानिक परीक्षण और ऑटोमोबाइल कंपनियों से सलाह-मशविरा करने के बाद लागू किया गया है।