कानपुर न्यूज डेस्क: कानपुर के हैलट अस्पताल में एक महिला में एचआईवी संक्रमण की पुष्टि हुई है। महिला करीब एक महीने पहले निजी अंग में गंभीर संक्रमण की शिकायत लेकर अस्पताल के त्वचा रोग विभाग पहुंची थी। जांच के दौरान एचआईवी संक्रमण का पता चला। डॉक्टरों ने बताया कि महिला ने कुछ समय पहले टैटू भी बनवाया था, जिसके बाद संक्रमण के संभावित कारणों की भी जांच की जा रही है।
महिला का इलाज कर रहे चर्म रोग विशेषज्ञ डॉ. श्वेतांक ने बताया कि फिलहाल यह कहना सही नहीं होगा कि संक्रमण केवल टैटू बनवाने की वजह से हुआ है। हालांकि, यदि टैटू बनाते समय दूषित या पहले से इस्तेमाल की गई सुई का उपयोग किया जाए, तो एचआईवी समेत कई गंभीर संक्रमण फैलने का खतरा रहता है।
जांच के बाद महिला को एंटी रेट्रोवायरल थैरेपी (ART) सेंटर भेजा गया था, लेकिन बाद में परिवार उसे निजी अस्पताल ले गया, जहां उसका इलाज जारी है। डॉक्टरों के अनुसार, एचआईवी का फिलहाल कोई स्थायी इलाज नहीं है, लेकिन समय पर इलाज और नियमित दवाओं से संक्रमित व्यक्ति लंबे समय तक सामान्य जीवन जी सकता है।
विशेषज्ञों ने बताया कि असुरक्षित तरीके से टैटू बनवाने पर केवल एचआईवी ही नहीं, बल्कि हेपेटाइटिस बी, हेपेटाइटिस सी और अन्य त्वचा संक्रमणों का भी खतरा रहता है। इसके अलावा लाल और हरे रंग की कुछ टैटू स्याही से एलर्जी, खुजली और त्वचा पर चकत्ते जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं।
डॉक्टरों ने लोगों से अपील की है कि टैटू हमेशा किसी प्रमाणित और स्वच्छ स्टूडियो से ही बनवाएं। यह सुनिश्चित करें कि टैटू आर्टिस्ट आपके सामने नई, सीलबंद और कीटाणुरहित सुई का इस्तेमाल करे। साथ ही रंग और अन्य उपकरण भी पूरी तरह साफ और सुरक्षित होने चाहिए। विशेषज्ञों का कहना है कि थोड़ी सी सावधानी गंभीर संक्रमण के खतरे को काफी हद तक कम कर सकती है।