कानपुर न्यूज डेस्क: बारिश ने एक बार फिर कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे की निर्माण गुणवत्ता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। रविवार को असोहा और अचलगंज क्षेत्र में बारिश के बाद करीब 10 जगह सड़क धंस गई। कई स्थानों पर जलनिकासी की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने से पानी सड़क पर जमा रहा। वहीं एक जगह नाली टूटने के कारण भी जलभराव की स्थिति बनी, जिससे एक्सप्रेसवे पर यातायात प्रभावित हुआ।
करीब 4200 करोड़ रुपये की लागत से तैयार इस एक्सप्रेसवे पर सड़क धंसने की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। रविवार को असोहा क्षेत्र में ही आठ स्थानों पर सड़क प्रभावित मिली। कानपुर से लखनऊ जाने वाली भारी वाहन लेन पर कई जगह पानी जमा था। किलोमीटर 47.9 से 47.1 तक करीब 800 मीटर और 46.6 से 46.3 तक करीब 300 मीटर हिस्से में जलभराव देखा गया। तूरी के पास भी सड़क पर बरसाती पानी जमा रहा, जबकि किलोमीटर 45.5 पर पूरी सड़क पानी से प्रभावित नजर आई।
मेदपुर के पास किलोमीटर 44.4 से 44.1, कुदिकापुर के पास 41.3 से 41 और किलोमीटर 42.2 पर भी सड़क के दबे हुए हिस्सों में पानी भरा मिला। इसके अलावा किलोमीटर 44.6 और 40.6 पर जलनिकासी की नालियां टूटने से स्थिति और खराब हो गई। अचलगंज क्षेत्र में किलोमीटर 62 और 63 पर भी सड़क धंसने की जानकारी सामने आई।
मरम्मत के दौरान हल्के वाहनों का डायवर्जन
एक्सप्रेसवे के कांथा स्थित किलोमीटर 39.7 और बेगमखेड़ा के पास किलोमीटर 30.6 पर रविवार को मरम्मत का काम तेज किया गया। हालांकि बारिश के कारण कुछ समय के लिए काम रोकना पड़ा। मौसम साफ होने के बाद दोबारा मरम्मत शुरू की गई।
काम के दौरान हल्के वाहनों के लिए दोनों लेन बंद कर दी गईं। यातायात को डायवर्ट कर भारी वाहनों के लिए निर्धारित लेन से निकाला गया, ताकि मरम्मत के दौरान किसी तरह की परेशानी न हो।
सात मिनट में भी नहीं निकला पानी
एक्सप्रेसवे के ड्रेनेज सिस्टम को लेकर भी गंभीर सवाल उठे हैं। शनिवार को एनएचएआई की केंद्रीय कमेटी के वरिष्ठ सदस्य (तकनीकी) आलोक दीपांकर ने ड्रेनेज व्यवस्था की जांच की। इस दौरान सामने आया कि सोख्ता तकनीक से बनी सड़क पटरी में डाला गया पानी सात मिनट से ज्यादा समय तक भी बाहर नहीं निकल सका।
दीपांकर ने एक्सप्रेसवे के किलोमीटर 32.4 पर सहरावां गांव के पास जांच की। उन्होंने सड़क की पटरी में करीब चार वर्ग फीट का गड्ढा खुदवाकर टैंकर से पानी डलवाया। इसके बाद पानी के सड़क के दूसरी ओर निकलने का इंतजार किया गया, लेकिन करीब सात मिनट बाद भी पानी बाहर नहीं आया। उन्होंने एक कर्मचारी को पानी निकलने में लगने वाला समय नोट करने के लिए मौके पर तैनात कर दिया।
इसके बाद एनएचएआई अधिकारी किलोमीटर 30.6 स्थित बेगमखेड़ा गांव पहुंचे, जहां सड़क की खुदाई कर मरम्मत का काम चल रहा था। उन्होंने वहां किए जा रहे कार्य की गुणवत्ता भी देखी। काम संतोषजनक नहीं मिलने पर उन्होंने निर्माण एजेंसी पीएनसी इंफ्राटेक लिमिटेड के जिम्मेदार अधिकारियों के प्रति नाराजगी जताई।
बारिश के बाद बार-बार सड़क धंसने और जलनिकासी व्यवस्था के कमजोर होने से अब एक्सप्रेसवे की निर्माण गुणवत्ता और ड्रेनेज सिस्टम दोनों पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।