कानपुर न्यूज डेस्क: लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे की सड़क निर्माण गुणवत्ता पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। 63 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेसवे के शुरू होने के महज 18 दिन में 84 जगह सड़क धंसने और मरम्मत की नौबत आने का दावा किया गया है। स्थिति को देखते हुए एनएचएआई ने निर्माण कंपनी पीएनसी इंफ्राटेक को नॉन-परफॉर्मर घोषित कर दिया और कंपनी के तीन अधिकारियों को हटाया गया है। अब आईआईटी खड़गपुर की टीम एक्सप्रेसवे की तकनीकी जांच करेगी।
जांच के दौरान एक्सप्रेसवे की लखनऊ-कानपुर लेन पर 39 और कानपुर-लखनऊ लेन पर 45 जगह मरम्मत किए जाने की बात सामने आई। 30 जुलाई को गिट्टी से लदा एक ट्रक सड़क धंसने के कारण पलट गया था। इसके बाद करीब 1000 वर्ग फीट सड़क को हटाकर दो फीट गहरा हिस्सा दोबारा बनाया गया, लेकिन करीब 12 घंटे बाद ही उसी जगह 1 से 2 इंच की दरार दिखाई देने लगी। एक्सप्रेसवे के किनारों के शोल्डर और नालियों में भी नुकसान मिला है।
तकनीकी विशेषज्ञों ने सड़क के नीचे मिट्टी की परत बिछाने और उसे दबाने के तरीके पर सवाल उठाए हैं। एक इंजीनियर के मुताबिक, सामान्य तौर पर मिट्टी को करीब 50 सेंटीमीटर की परत में डालकर रोलर से दबाया जाता है, लेकिन यहां कुछ जगहों पर 1 से 2 मीटर तक मिट्टी एक साथ डाले जाने की आशंका है। ग्राउंड जांच के दौरान कई जगह सड़क पर उछाल, झटके और 2 से 3 इंच तक की दरारें भी मिलीं। कुछ हिस्सों में 100 किलोमीटर प्रति घंटे की निर्धारित गति से वाहन चलाना भी मुश्किल बताया गया।
इस एक्सप्रेसवे का निर्माण करीब 4700 करोड़ रुपये की लागत से हुआ है, यानी एक किलोमीटर पर लगभग 75 करोड़ रुपये खर्च हुए। निर्माण कंपनी पीएनसी इंफ्राटेक के मालिक भाजपा सांसद नवीन जैन के भाई प्रदीप जैन बताए जाते हैं। कंपनी पर पहले एनएचएआई अधिकारियों को कथित रिश्वत देने से जुड़े मामले में नए टेंडर में हिस्सा लेने पर प्रतिबंध भी लगा था, हालांकि बाद में यह प्रतिबंध हटा दिया गया। अब सड़क की गुणवत्ता को लेकर आईआईटी खड़गपुर की जांच से यह साफ होने की उम्मीद है कि एक्सप्रेसवे में आई खराबियों की असली वजह क्या है।