कानपुर न्यूज डेस्क: लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे के शुरू होने के करीब एक महीने बाद ही इसकी सड़क और निर्माण गुणवत्ता को लेकर सवाल और गंभीर हो गए हैं। मंगलवार को पुल के क्रैश बैरियर में दरार और करीब 10 मीटर लंबी सड़क धंसने की घटना सामने आई। इससे एक्सप्रेसवे पर सुरक्षा और निर्माण की मजबूती को लेकर चिंता बढ़ गई है।
13 जुलाई से 11 अगस्त के बीच 45 किलोमीटर लंबे ग्रीनफील्ड हिस्से में करीब 45 जगह सड़क धंसने, बैठने या मरम्मत के बाद दोबारा खराब होने की शिकायत सामने आ चुकी है। एनएचएआई के अधिकारियों के मुताबिक, इनमें 40 से ज्यादा जगहों पर मरम्मत कराई जा चुकी है, जबकि मंगलवार को पांच स्थानों पर काम जारी था।
10 मीटर सड़क धंसी, भारी वाहनों की आवाजाही रोकी
मंगलवार को किलोमीटर 29.84 के पास हसनापुर में करीब 10 मीटर लंबा सड़क का हिस्सा धंस गया। यह नुकसान कानपुर से लखनऊ जाने वाली लेन में हुआ। यहां पहले भी कई जगह पैचवर्क कराया गया था, लेकिन अब कुछ स्थानों पर वही मरम्मत उखड़ने लगी है।
सड़क धंसने की सूचना मिलते ही मरम्मत टीम मौके पर पहुंची। प्रभावित हिस्से के साथ आसपास की सड़क को भी खोदकर दोबारा निर्माण कराया गया। अधिकारियों के अनुसार शाम तक इस हिस्से की मरम्मत पूरी कर दी गई।
कई जगह बिटुमिनस परत उखड़ी
किलोमीटर 32.8 से 33.1 के बीच कई जगह सड़क की ऊपरी बिटुमिनस परत उखड़ रही है। कुछ हिस्सों में करीब एक फीट गहराई तक सड़क खोदकर दोबारा बिछाई जा रही है। वहीं किलोमीटर 33.5 पर करीब 150 मीटर सड़क को भी फिर से बनाया जा रहा है।
एक अन्य हिस्से में किलोमीटर 63.9 पर तीन दिन पहले धंसी सड़क की मरम्मत कराई गई थी। लेकिन मंगलवार को नई बिछाई गई बिटुमिनस परत कई जगह से उखड़ती दिखाई दी। खासकर बीच वाली लेन में नुकसान ज्यादा नजर आया, जिसके चलते वाहनों को सावधानी से निकालने की व्यवस्था की गई।
पुल के क्रैश बैरियर में भी दरार
एक्सप्रेसवे के किलोमीटर 30.1 पर चिरैया नाला के ऊपर बने पुल के क्रैश बैरियर में करीब 2.25 फीट लंबी दरार मिली है। करीब तीन फीट ऊंचे इस बैरियर में दरार काफी गहरी दिखाई दे रही है।
यह मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि एक्सप्रेसवे पर वाहन 100 किलोमीटर प्रति घंटे तक की रफ्तार से चल सकते हैं। दुर्घटना की स्थिति में क्रैश बैरियर वाहन को सड़क से बाहर जाने से रोकने और उसका असर कम करने में अहम भूमिका निभाता है। ऐसे में पुल पर बैरियर में आई दरार ने सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।
एनएचएआई का कहना है कि यह दरार पुरानी है। हालांकि, इससे यह सवाल भी उठ रहा है कि अगर खामी पहले से मौजूद थी तो हाई-स्पीड एक्सप्रेसवे के पुल पर इसकी मरम्मत क्यों नहीं कराई गई।
डिवाइडर और कलवर्ट की दीवारों में भी दरार
एक्सप्रेसवे के कई हिस्सों में डिवाइडर और कंक्रीट के काम में भी खराबी सामने आई है। कई जगह प्लास्टर उखड़ रहा है और क्रैश बैरियर में दरारें दिखाई दे रही हैं।
किलोमीटर 55.4, 55.5 से 55.6 और 44.6 से 44.7 के बीच दरारें मिली हैं। वहीं किलोमीटर 56.4 से 56.5 और किलोमीटर 53 के पास कलवर्ट की दीवारों में भी गहरी दरारें सामने आई हैं। कुछ जगहों पर इन संरचनाओं से लगी सड़क में भी धंसाव के संकेत मिले हैं।
एक्सपेंशन जॉइंट भी बने परेशानी
पुल और कलवर्ट को सड़क से जोड़ने वाले एक्सपेंशन जॉइंट भी कई जगह खराब स्थिति में हैं। इन स्थानों पर सड़क धंसने के साथ गड्ढे बन गए हैं। कुछ गड्ढे करीब दो फीट चौड़े और छह इंच तक गहरे बताए जा रहे हैं।
इन असमान हिस्सों से गुजरते समय वाहनों को तेज झटका लग रहा है। हाई-स्पीड एक्सप्रेसवे पर ऐसी स्थिति दुर्घटना का खतरा बढ़ा सकती है।
ड्रेनेज व्यवस्था पर भी सवाल
एक्सप्रेसवे पर पानी की निकासी को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। उन्नाव-लखनऊ लेन में किलोमीटर 44.7 के पास चार स्थानों पर ड्रेनेज की व्यवस्था नहीं होने की बात सामने आई है।
किलोमीटर 49 से 60 के बीच तीन जगह सड़क धंसने की शिकायत मिली है। उम्मद खेड़ा और इजराइल खेड़ा में महज दो दिन पहले किया गया पैचवर्क भी उखड़ने लगा है। इससे मरम्मत की गुणवत्ता और टिकाऊपन पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
आईआईटी खड़गपुर की टीम ने जुटाए 50 से ज्यादा सैंपल
एक्सप्रेसवे की खामियों की जांच के लिए आईआईटी खड़गपुर की टीम अपना फील्ड सर्वे पूरा कर चुकी है। टीम अलग-अलग स्थानों से 50 से ज्यादा सैंपल लेकर गई है। इसके अलावा कई जगहों की तस्वीरें और वीडियो भी रिकॉर्ड किए गए हैं।
एनएचएआई के लखनऊ क्षेत्रीय अधिकारी और मुख्य महाप्रबंधक गौतम विशाल ने बताया कि इन सैंपलों पर लैब में एडवांस जांच की जाएगी। टीम करीब सात दिन में अपनी रिपोर्ट दे सकती है। जांच में अगर निर्माण से जुड़ी कोई गंभीर खामी सामने आती है तो ठेकेदार के खिलाफ आगे की कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल एनएचएआई का कहना है कि प्रभावित हिस्सों में सुधार का काम जारी है। लेकिन एक्सप्रेसवे खुलने के महज एक महीने में सड़क धंसने, मरम्मत के दोबारा खराब होने, क्रैश बैरियर में दरार और ड्रेनेज से जुड़ी शिकायतों ने इसकी निर्माण गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।