कानपुर न्यूज डेस्क: करीब 4,200 करोड़ रुपये की लागत से बने लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे के उद्घाटन के महज तीन सप्ताह बाद इसकी गुणवत्ता को लेकर विवाद शुरू हो गया है। सोशल मीडिया पर वायरल हुए कुछ वीडियो में एक्सप्रेसवे पर दरार और मरम्मत का काम होते हुए दिखाया गया, जिसके बाद विपक्ष ने सरकार पर निशाना साधा।
समाजवादी पार्टी के एक नेता ने सबसे पहले एक वीडियो साझा कर सड़क पर दरार होने का दावा किया। इसके कुछ दिन बाद दूसरा वीडियो सामने आया, जिसमें सड़क की मरम्मत होती दिखाई दी। इस पर सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने तंज कसते हुए लिखा, "चल कम रहा है, धंस ज्यादा रहा है: लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे।"
हालांकि, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने एक्सप्रेसवे को किसी भी तरह का बड़ा नुकसान होने से इनकार किया है। प्राधिकरण के मुताबिक, यह एक्सप्रेसवे 13 जुलाई को शुरू किया गया था और इससे लखनऊ से कानपुर के बीच यात्रा का समय करीब 90 मिनट से घटकर 35-40 मिनट रह गया है।
NHAI ने बताया कि पहला वीडियो उन्नाव के कोरारी क्षेत्र में किलोमीटर-64 के पास सड़क की ऊपरी सतह पर हुई सीमित फिसलन (Surface Slippage) का था, जिसे छह घंटे के भीतर ठीक कर दिया गया और उसी दिन यातायात बहाल कर दिया गया।
दूसरे वीडियो को लेकर NHAI का कहना है कि यह पूरी सड़क का निरीक्षण करने के बाद किया गया निवारक रखरखाव (Preventive Maintenance) और सुधार कार्य था। परियोजना निदेशक नकुल प्रकाश वर्मा ने कहा कि सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो वर्तमान स्थिति को नहीं दिखाते।
प्राधिकरण ने यह भी स्पष्ट किया कि एक्सप्रेसवे 15 साल की डिफेक्ट लाइबिलिटी पीरियड (DLP) के तहत आता है। इस अवधि में सड़क की मरम्मत और रखरखाव की जिम्मेदारी निर्माण कंपनी की होगी और इसके लिए सरकार पर कोई अतिरिक्त खर्च नहीं आएगा।
NHAI के अनुसार, सड़क धंसने का दावा गलत है। केवल करीब 40 मीटर हिस्से की बिटुमिनस (ऊपरी) परत प्रभावित हुई थी, जबकि एक्सप्रेसवे की संरचना पूरी तरह सुरक्षित है।