NEET री-टेस्ट से पहले टेलीग्राम बैन पर छिड़ी बहस, IIT कानपुर निदेशक के दावों को युवाओं ने किया फैक्ट-चेक

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Posted On:Wednesday, June 17, 2026

कानपुर न्यूज डेस्क: सोशल मीडिया पर NEET UG 2026 री-टेस्ट से पहले टेलीग्राम पर लगाए गए अस्थायी प्रतिबंध को लेकर विवाद और गहरा गया है। इस बहस के केंद्र में IIT कानपुर के निदेशक Manindra Agrawal और युवा टेक डेवलपर्स Sarthak Sidhant व Nisarga Adhikary के बीच हुई तीखी ऑनलाइन बहस रही। विवाद तब शुरू हुआ जब अग्रवाल ने दावा किया कि टेलीग्राम की एडिटिंग सुविधा का इस्तेमाल कर परीक्षा के बाद पुराने पोस्ट एडिट करके फर्जी पेपर लीक के सबूत तैयार किए जा सकते हैं।

इस दावे पर निशर्गा ने सवाल उठाते हुए कहा कि टेलीग्राम पर किसी भी एडिट का रिकॉर्ड और टाइमस्टैम्प स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। उन्होंने यह भी बताया कि टेलीग्राम का कोड ओपन-सोर्स है और कोई भी इसकी कार्यप्रणाली की जांच कर सकता है। इसके बाद सार्थक सिद्धांत भी बहस में शामिल हुए और उन्होंने स्क्रीनशॉट साझा करते हुए दिखाया कि एक साधारण "meow meow" संदेश को एडिट करने पर भी "edited" का निशान दिखाई देता है। उन्होंने IIT कानपुर निदेशक के दावे को गलत बताते हुए कहा कि यदि गलत सूचना फैलना ही प्रतिबंध का आधार है, तो अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी यही तर्क लागू होगा।

बहस के दौरान कई तकनीकी विशेषज्ञों और डेवलपर्स ने भी टेलीग्राम प्रतिबंध की प्रभावशीलता पर सवाल उठाए। उनका कहना था कि पेपर लीक करने वाले लोग Discord, Signal, WhatsApp, Reddit, क्लाउड सर्वर या अन्य प्लेटफॉर्म का भी इस्तेमाल कर सकते हैं। कई यूजर्स ने यह भी दावा किया कि VPN के जरिए टेलीग्राम तक पहुंच अभी भी संभव है। वहीं, डेवलपर्स ने चेतावनी दी कि ऐसे प्रतिबंधों का असर उन व्यवसायों, शैक्षणिक समूहों, एआई बॉट्स और डेवलपर समुदायों पर भी पड़ता है जो वैध उद्देश्यों के लिए टेलीग्राम का उपयोग करते हैं।

दूसरी ओर, सरकार और NTA का कहना है कि यह कदम 21 जून को होने वाली NEET री-टेस्ट से पहले फर्जी पेपर लीक दावों और अफवाहों को रोकने के लिए उठाया गया है। परीक्षा के लिए साइबर निगरानी, चैनल टेकडाउन और कई एजेंसियों के समन्वय जैसी अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्थाएं भी लागू की गई हैं। हालांकि आलोचकों का तर्क है कि किसी एक प्लेटफॉर्म पर रोक लगाने के बजाय परीक्षा प्रणाली की कमजोरियों को दूर करना ज्यादा जरूरी है। इसी वजह से यह बहस अब सिर्फ टेलीग्राम तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि परीक्षा सुरक्षा, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की भूमिका पर भी सवाल खड़े कर रही है।


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