कानपुर न्यूज डेस्क: लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे शुरू होने के बाद इस मार्ग पर वाहनों की संख्या लगातार बढ़ रही है। 13 जुलाई को उद्घाटन के बाद एक्सप्रेसवे पर पहले ही सप्ताह में हजारों वाहन दौड़े हैं। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के अनुसार, 14 जुलाई को पहले दिन करीब 18 हजार वाहन एक्सप्रेसवे से गुजरे, जिनमें 16 हजार से अधिक कार, जीप और अन्य हल्के वाहन शामिल थे। 17 और 18 जुलाई तक यह संख्या बढ़कर 24 हजार से अधिक पहुंच गई।
करीब 4,200 करोड़ रुपये की लागत से बने 63 किलोमीटर लंबे लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर वाहनों की अधिकतम गति 120 किमी प्रति घंटा निर्धारित की गई है। इस गति से सफर करने पर एंट्री पॉइंट से लखनऊ या उन्नाव तक की दूरी लगभग 35 मिनट में तय की जा सकती है। पहले पुराने राष्ट्रीय राजमार्ग पर बढ़ती आबादी और भारी ट्रैफिक के कारण अक्सर जाम की स्थिति बन जाती थी, खासकर त्योहारों और छुट्टियों के दौरान।
एनएचएआई अधिकारियों के मुताबिक, एक्सप्रेसवे से समय के साथ ईंधन की भी बचत हो रही है। हालांकि उन्नाव में एक्सप्रेसवे समाप्त होने के बाद कानपुर शहर की ओर जाने वाले हिस्से में अभी भी जाम की समस्या बनी हुई है। परियोजना निदेशक नकुल प्रकाश वर्मा ने बताया कि कानपुर रिंग रोड को एक्सप्रेसवे से जोड़ने के बाद यह समस्या काफी हद तक दूर हो जाएगी। उन्होंने कहा कि 3,075 रुपये का वार्षिक फास्टैग पास इस मार्ग पर नियमित यात्रा करने वालों के लिए किफायती विकल्प है, जिसमें एक तरफ की यात्रा का खर्च करीब 15 रुपये पड़ता है।
शुरुआत में माना जा रहा था कि अधिक टोल शुल्क के कारण बस और ट्रक चालक इस एक्सप्रेसवे का कम उपयोग करेंगे, लेकिन आंकड़े अलग तस्वीर दिखा रहे हैं। 14 जुलाई को 2 और 3 एक्सल वाली 1,000 से अधिक बसें और ट्रक इस मार्ग से गुजरे। 15 जुलाई को यह संख्या करीब 1,400, 16 जुलाई को 2,200, 17 जुलाई को 2,500, 18 जुलाई को 2,000 और 19 जुलाई को लगभग 1,500 रही। इससे स्पष्ट है कि मालवाहक वाहन भी समय और ईंधन की बचत के लिए एक्सप्रेसवे का इस्तेमाल कर रहे हैं।