नई दिल्ली: वक्फ संशोधन विधेयक 2024 देर रात 2 बजे लोकसभा में पारित हो गया। इस विधेयक के पक्ष में 288 वोट पड़े, जबकि विपक्ष में 232 वोट पड़े। अब यह विधेयक राज्यसभा में पेश किया जाएगा, जहां इस पर व्यापक चर्चा होने की संभावना है। भाजपा के सहयोगी दलों, जिनमें शिवसेना, जेडीयू, टीडीपी और एलजेपी शामिल हैं, ने लोकसभा में सरकार का समर्थन किया।
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू का बयान
विधेयक पर चर्चा का जवाब देते हुए केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि भारत में अल्पसंख्यकों के लिए इससे अधिक सुरक्षित कोई स्थान नहीं है। उन्होंने कहा कि भारत में बहुसंख्यक समाज की धर्मनिरपेक्षता के कारण पारसी जैसे छोटे समुदाय भी सुरक्षित हैं।
राज्यसभा में विधेयक की स्थिति
लोकसभा में वक्फ संशोधन विधेयक 2024 को पारित करने के बाद आज इसे राज्यसभा में पेश किया जाएगा। राज्यसभा में इस विधेयक पर चर्चा के लिए 9 घंटे का समय निर्धारित किया गया है। वर्तमान में राज्यसभा के कुल 236 सदस्य हैं, जिसमें से विधेयक पारित करने के लिए सरकार को 119 वोटों की जरूरत होगी। सरकार और उसके सहयोगियों के पास 115 वोट हैं, जबकि विपक्ष के पास भी 115 वोट हैं। ऐसे में 6 मनोनीत सदस्यों के वोट विधेयक की दिशा तय करेंगे।
क्या एनडीए को तटस्थ दलों से समर्थन मिलेगा?
राज्यसभा में भाजपा के 98 सांसद हैं, जबकि जेडीयू के 4, टीडीपी के 2, एनसीपी के 3, असम गण परिषद के 1, एनपीपी के 1, राष्ट्रीय लोक दल के 1, आरपीआई के 1 और शिवसेना के 1 सदस्य हैं। इसके अलावा, बीजू जनता दल (7 सांसद), एआईएडीएमके (4 सांसद) और वाईएसआर कांग्रेस (7 सांसद) भी सरकार के पक्ष में वोट कर सकते हैं।
राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद लागू होगा विधेयक
यदि विधेयक राज्यसभा में पारित हो जाता है, तो इसे राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद सरकार इसे राजपत्र अधिसूचना के माध्यम से लागू करेगी। इससे संबंधित सभी सरकारी प्रक्रियाओं को शीघ्र पूरा करने की योजना बनाई गई है।
विधेयक के प्रमुख संशोधन
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बोर्ड और परिषद की सदस्यता: पहले वक्फ बोर्ड की परिषद में केवल मुस्लिम सदस्य ही शामिल हो सकते थे। अब इस विधेयक के पारित होने के बाद परिषद में 2 महिलाओं और 2 गैर-मुस्लिमों को शामिल करना अनिवार्य होगा।
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संपत्ति पर दावा: पहले वक्फ बोर्ड किसी भी संपत्ति पर दावा घोषित कर सकता था। अब किसी भी संपत्ति पर स्वामित्व का दावा करने से पहले, वक्फ बोर्ड के लिए यह सत्यापित करना अनिवार्य होगा कि संपत्ति वास्तव में वक्फ बोर्ड की है।
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सरकारी संपत्ति की स्थिति: पहले, वक्फ बोर्ड सरकारी संपत्ति पर भी दावा कर सकता था। अब सरकारी संपत्ति वक्फ के बाहर रहेगी और वक्फ बोर्ड का सरकारी संपत्ति पर मालिकाना हक नहीं होगा।
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अपील का अधिकार: पहले, वक्फ बोर्ड के खिलाफ केवल वक्फ ट्रिब्यूनल में ही मामला दायर किया जा सकता था और उसका निर्णय अंतिम होता था। अब वक्फ न्यायाधिकरण के निर्णय को 90 दिनों के भीतर उच्च न्यायालय में चुनौती दी जा सकेगी।
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प्रबंधन और पर्यवेक्षण: पहले, वक्फ बोर्ड के खिलाफ दुर्व्यवहार की शिकायतें सुनने को मिलती थीं। अब वक्फ बोर्ड की सभी संपत्तियों का पंजीकरण जिला मुख्यालय पर होगा।
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विशेष समुदायों के लिए अलग प्रावधान: पहले वक्फ बोर्ड में सभी के लिए एक जैसे कानून थे। अब बोहरा और आगा खानी मुसलमानों के लिए अलग वक्फ बोर्ड बनाया जाएगा।
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वक्फ बोर्ड के सदस्य: पहले वक्फ बोर्ड पर विशिष्ट मुस्लिम समुदायों का नियंत्रण था। अब वक्फ बोर्ड में शिया और सुन्नी सहित पिछड़े वर्ग के मुस्लिम समुदायों के सदस्य भी होंगे।
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तीन सांसदों का प्रवेश: पहले, केंद्रीय वक्फ परिषद में 3 सांसद होते थे (2 लोकसभा और 1 राज्यसभा) और तीनों सांसद मुस्लिम होने चाहिए थे। अब केंद्र सरकार केंद्रीय वक्फ परिषद में तीन सांसदों की नियुक्ति करेगी और उनका मुसलमान होना अनिवार्य नहीं होगा।
विधेयक का राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव
वक्फ संशोधन विधेयक 2024 को लेकर देशभर में चर्चा हो रही है। इस विधेयक के समर्थन और विरोध में विभिन्न दलों और संगठनों की राय बंटी हुई है। राज्यसभा में इसके पारित होने के बाद इसका प्रभाव स्पष्ट रूप से देखा जाएगा। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार इसे किस तरह राज्यसभा में पारित कराती है और किस तरह के तटस्थ दलों का समर्थन प्राप्त करती है।