कानपुर न्यूज डेस्क: कानपुर में अवैध किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट की जांच में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। पुलिस जांच में यह नेटवर्क सिर्फ कानपुर तक सीमित नहीं, बल्कि लखनऊ, दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और नेपाल तक फैला हुआ पाया गया है। अकेले कानपुर में ही 7-8 अस्पताल इस रैकेट के दायरे में आए हैं, जिससे स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
मामले में गिरफ्तार ओटी टेक्नीशियन कुलदीप सिंह राघव और राजेश कुमार ने पूछताछ में कई अहम जानकारियां दी हैं। उन्होंने बताया कि एक नर्सिंग होम में हाल ही में किडनी ट्रांसप्लांट हुआ था, हालांकि वे अंधेरे के कारण उसकी सटीक लोकेशन नहीं बता सके। डीसीपी वेस्ट एसएम कासिम आबिदी के मुताबिक, दोनों ने खुलासा किया कि रविवार रात दो डॉक्टरों की टीम ट्रांसप्लांट के लिए पहुंची थी, लेकिन पुलिस की भनक लगते ही एक ऑपरेशन के बाद ही वहां से फरार हो गई।
जांच में यह भी सामने आया है कि रैकेट का मास्टरमाइंड डॉ रोहित है, जो गाजियाबाद के इंदिरापुरम से संचालित होता था। वह हर ट्रांसप्लांट के लिए सहयोगियों को 40-40 हजार रुपये और फ्लाइट टिकट देता था। पुलिस ने डॉ अली के घर पर भी छापा मारा है, जिनकी भूमिका संदिग्ध बताई जा रही है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि वह डॉक्टर नहीं, बल्कि तकनीशियन हो सकता है, हालांकि इसकी पुष्टि अभी बाकी है।
कानपुर के केशवपुरम स्थित आहुजा अस्पताल इस रैकेट का मुख्य केंद्र बताया जा रहा है, जहां रविवार रात अवैध किडनी ट्रांसप्लांट किया गया। इस मामले में अस्पताल संचालक डॉ सुरजीत सिंह आहुजा, उनकी पत्नी और आईएमए उपाध्यक्ष डॉ प्रीति आहुजा समेत कई लोगों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस के अनुसार, इस गिरोह ने ‘किडनी डोनर’ नाम के टेलीग्राम ग्रुप के जरिए डील फाइनल की जाती थी और आरोपी विदेश भागने की फिराक में थे।
पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल ने बताया कि जांच में कई अहम सुराग मिले हैं और अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी जारी है। फिलहाल डॉ अफजल, डॉ अनुराग और डॉ वैभव समेत कई संदिग्धों की तलाश की जा रही है। पुलिस का दावा है कि जल्द ही इस पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश कर दिया जाएगा।