कानपुर न्यूज डेस्क: घाटमपुर और कानपुर के बीच चलने वाली सीएनजी बसों का अचानक बंद होना स्थानीय निवासियों के लिए एक बड़ी मुसीबत बन गया है। इस मार्ग पर बसें न चलने के कारण हजारों यात्री परेशान हैं, जिसका सबसे बुरा असर छात्रों, व्यापारियों और उन मरीजों पर पड़ रहा है जिन्हें नियमित इलाज के लिए शहर जाना पड़ता है। गुरुवार को इस समस्या के समाधान के लिए घाटमपुर के एक सभासद ने सीधे लखनऊ का रुख किया और स्थिति की गंभीरता से शासन को अवगत कराया।
लखनऊ में प्रदेश के परिवहन मंत्री दया शंकर से मुलाकात के दौरान सभासद ने उन्हें एक औपचारिक पत्र सौंपा। उन्होंने बताया कि सीएनजी बसें ग्रामीण और अर्ध-शहरी आबादी के लिए जीवन रेखा के समान हैं। बसों के बंद होने से लोगों की दिनचर्या बाधित हो गई है और परिवहन का कोई अन्य विश्वसनीय सरकारी विकल्प न होने से जनता में रोष बढ़ रहा है। यह मुद्दा अब केवल असुविधा का नहीं बल्कि सीधे तौर पर लोगों की आजीविका से जुड़ गया है।
आर्थिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो सीएनजी बसों का बंद होना आम आदमी की जेब पर भारी पड़ रहा है। सस्ते सरकारी किराए की अनुपलब्धता में लोग निजी वाहनों और टैक्सी संचालकों के भरोसे हैं, जो मनमाना किराया वसूल रहे हैं। इससे विशेष रूप से मध्यम और निम्न आय वर्ग के परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ गया है। समाजसेवी ने मंत्री को स्पष्ट किया कि जब तक ये बसें दोबारा शुरू नहीं होतीं, तब तक आम जनता को इस 'महंगे सफर' से राहत मिलना नामुमकिन है।
परिवहन मंत्री दया शंकर ने इस जनहित के मामले को ध्यानपूर्वक सुना और यात्रियों की परेशानियों पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने सभासद को आश्वस्त किया कि विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को इस संबंध में तत्काल निर्देश जारी किए जाएंगे। मंत्री ने वादा किया कि तकनीकी या प्रशासनिक बाधाओं को दूर कर घाटमपुर-कानपुर मार्ग पर सीएनजी बसों का संचालन जल्द से जल्द बहाल किया जाएगा, ताकि यात्रियों को फिर से सुगम और सस्ती यात्रा की सुविधा मिल सके।