अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर अपने आक्रामक व्यापारिक नीतियों को लेकर चर्चा में हैं। इस बार वजह बना है टैरिफ युद्ध, जिसने न सिर्फ अमेरिकी शेयर बाजार को हिला कर रख दिया है बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी भारी असर डाला है। कोविड-19 के बाद के सबसे बड़े आर्थिक संकट की छाया अब अमेरिका पर गहरा रही है, लेकिन ट्रंप अपनी नीतियों के बचाव में डटे हुए हैं। उनका कहना है कि यह "बड़े और सुंदर सौदे" (Big Beautiful Deal) की ओर उठाया गया एक आवश्यक कदम है।
शेयर बाजार में भूचाल: दो दिन में 5 ट्रिलियन डॉलर का नुकसान
पिछले कुछ दिनों में अमेरिकी शेयर बाजार में भयंकर गिरावट देखी गई है। स्टैंडर्ड एंड पूअर्स 500 (S&P 500) में 6% की गिरावट, डॉव जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज (DJIA) में 5.5% और नैस्डैक (Nasdaq) में 5.8% की गिरावट आई है। दो दिन के भीतर बाजार मूल्य में 5 ट्रिलियन डॉलर का नुकसान हो गया। इसे कोविड-19 महामारी के बाद सबसे बड़ा आर्थिक झटका माना जा रहा है। यह गिरावट तब शुरू हुई जब चीन ने ट्रंप के टैरिफ का जवाब देते हुए अमेरिकी आयातों पर 34% तक का काउंटर टैरिफ लगाने की घोषणा की। यह नया शुल्क 10 अप्रैल से प्रभावी होगा, जिससे अमेरिका की कई प्रमुख कंपनियों पर सीधा असर पड़ेगा।
“बड़े सौदे की तरफ बढ़ रहे हैं” : ट्रंप का बचाव
इन तमाम झटकों के बीच ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर पोस्ट करते हुए अपनी नीतियों का बचाव किया। उन्होंने लिखा, "बड़े व्यवसाय टैरिफ को लेकर चिंतित नहीं हैं, वे जानते हैं कि वे यहीं रहेंगे। उनका ध्यान बिग ब्यूटीफुल डील पर है, जो हमारी अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देगा।" उन्होंने आर्थिक दर्द की तुलना सर्जरी से की—जहाँ अल्पकालिक पीड़ा से दीर्घकालिक लाभ प्राप्त किया जा सकता है।
"अमीर बनने का अच्छा मौका" - ट्रंप
ट्रंप ने अपने समर्थकों से कहा, “यह अमीर बनने का बहुत अच्छा समय है।” उन्होंने व्यापार असंतुलन को ठीक करने के लिए इस अस्थायी असुविधा को जरूरी बताया और भरोसा जताया कि अमेरिका इससे और मजबूत होकर उभरेगा। उन्होंने एक और पोस्ट में लिखा, “चीन ने गलत चाल चली है, वे घबरा गए हैं – जो वे बर्दाश्त नहीं कर सकते।” उन्होंने यह भी संकेत दिया कि अमेरिका अन्य देशों जैसे वियतनाम के साथ व्यापारिक समझौतों पर काम कर रहा है। उनके अनुसार, वियतनाम अमेरिका के साथ टैरिफ को शून्य करने के लिए तैयार है, जो अमेरिकी निर्यात के लिए नई संभावनाएं खोल सकता है।
विदेशी बाजारों में भी हड़कंप
अमेरिका में आई इस गिरावट की गूंज वैश्विक शेयर बाजारों में भी सुनाई दी।
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जर्मनी का DAX सूचकांक 5% गिरा,
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फ्रांस का CAC 40 4.3% टूटा,
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और जापान का निक्केई 225 2.8% लुढ़क गया।
इसके साथ ही कच्चे तेल की कीमतें 2021 के बाद के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई हैं और तांबे जैसी धातुओं में भी बड़ी गिरावट देखने को मिली है। वैश्विक निवेशक असमंजस में हैं और जोखिम से बचने के लिए शेयरों की बिकवाली कर रहे हैं।
अमेरिकी फेडरल रिजर्व की चेतावनी
इस स्थिति को लेकर अमेरिकी फेडरल रिजर्व के चेयरमैन जेरोम पॉवेल ने भी चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि टैरिफ से
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महंगाई (मुद्रास्फीति) बढ़ सकती है,
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सकल घरेलू उत्पाद (GDP) की वृद्धि दर धीमी हो सकती है,
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और इससे फेडरल रिजर्व को ब्याज दरों में कटौती करनी पड़ सकती है।
ट्रंप ने इस पर पलटवार करते हुए जेरोम पॉवेल को “राजनीति बंद करने” की सलाह दी और लिखा,
“ब्याज दरों में कटौती करो, जेरोम!”
प्रमुख कंपनियों को भारी नुकसान
टैरिफ युद्ध का असर कंपनियों पर भी साफ दिख रहा है।
इनमें से कई कंपनियों की आय का बड़ा हिस्सा चीन से आता है। अब उनके प्रोडक्ट महंगे हो जाएंगे, जिससे प्रतिस्पर्धा में नुकसान हो सकता है।
ट्रंप का आत्मविश्वास कायम
इन तमाम प्रतिकूल स्थितियों के बावजूद ट्रंप आत्मविश्वास से भरे हुए हैं। फ्लोरिडा स्थित अपने मार-ए-लागो रिसॉर्ट में उन्होंने गोल्फ खेलते हुए संवाददाताओं से कहा,
“केवल कमजोर लोग ही असफल होंगे।”
उनका मानना है कि यह व्यापार युद्ध एक रणनीतिक चाल है, जिससे अमेरिका को दीर्घकालिक फायदा मिलेगा।
क्या यह नीति अमेरिका को ले डूबेगी?
विश्लेषकों का मानना है कि टैरिफ युद्ध के कारण न सिर्फ अमेरिका में उपभोक्ता वस्तुएं महंगी होंगी, बल्कि निर्यातकों को भी बड़ा झटका लगेगा। खासतौर पर कृषि, ऑटोमोबाइल और टेक सेक्टर इससे बुरी तरह प्रभावित हो सकते हैं।
अर्थशास्त्री पॉल क्रुगमैन का कहना है, “यह एक खतरनाक जुआ है। यदि ट्रंप की रणनीति असफल होती है, तो इससे अमेरिका को दशकों पीछे जाना पड़ सकता है।”
निष्कर्ष: ट्रंप के फैसले का क्या होगा परिणाम?
डोनाल्ड ट्रंप की "अमेरिका फर्स्ट" नीति एक बार फिर केंद्र में है। उन्होंने अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए टैरिफ को हथियार के रूप में इस्तेमाल किया है, लेकिन इसका असर आम जनता, व्यवसायों और वैश्विक बाज़ारों पर साफ दिख रहा है। आने वाले हफ्तों में यह साफ हो जाएगा कि ट्रंप का यह आक्रामक कदम अमेरिका को "बिग डील" की ओर ले जाएगा या आर्थिक मंदी की ओर।