कानपुर न्यूज डेस्क: उत्तर प्रदेश के कानपुर का बहुचर्चित बिकरू कांड (2020) एक बार फिर सुर्खियों में है, लेकिन इस बार वजह कोई कानूनी कार्रवाई नहीं बल्कि यूपी बोर्ड परीक्षा का परिणाम है। इस कांड में आरोपी रहीं और करीब ढाई साल जेल की सलाखों के पीछे गुजारने वाली खुशी दुबे ने इंटरमीडिएट परीक्षा 2026 में प्रथम श्रेणी (61%) अंक हासिल कर सफलता का परचम लहराया है।
कानूनी संघर्ष के बीच पढ़ाई:
खुशी दुबे के लिए यह सफलता किसी बड़ी जीत से कम नहीं है। उन्होंने बताया कि कोर्ट-कचहरी के चक्कर, जेल का तनाव और अपनी मां के खराब स्वास्थ्य के कारण उनकी पढ़ाई में काफी रुकावटें आईं। इन तमाम विपरीत परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने हौसला नहीं हारा और परीक्षा की तैयारी जारी रखी। वर्तमान में वह अपनी प्रथम श्रेणी की सफलता से संतुष्ट हैं।
भविष्य का लक्ष्य: वकील बनने का सपना:
परीक्षा पास करने के बाद खुशी ने अपने जीवन के अगले बड़े लक्ष्य का खुलासा किया है। वह आगे स्नातक (Graduation) की पढ़ाई पूरी कर लॉ (Law) में दाखिला लेना चाहती हैं। खुशी के वकील बनने के पीछे एक भावनात्मक कारण है:
प्रेरणा: खुशी के अनुसार, जब वह जेल में थीं, तब उनके वकील शिवाकांत दीक्षित ने एक ढाल बनकर उनकी मदद की थी।
उद्देश्य: वह खुद भी एक काबिल वकील बनकर उन जरूरतमंदों को कानूनी सहायता पहुँचाना चाहती हैं, जो न्याय के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
बिकरू कांड का संक्षिप्त घटनाक्रम:
कानपुर के बिकरू गांव में 2 जुलाई 2020 की रात गैंगस्टर विकास दुबे और उसके साथियों ने घात लगाकर 8 पुलिसकर्मियों की हत्या कर दी थी। खुशी दुबे इस मामले में तब चर्चा में आईं जब पुलिस ने उन्हें साजिश में शामिल होने के आरोप में गिरफ्तार किया।
विवाह: बिकरू कांड से मात्र तीन दिन पहले (29 जून 2020) खुशी का विवाह विकास दुबे के भतीजे अमर दुबे से हुआ था।
मुठभेड़ और गिरफ्तारी: कांड के बाद पुलिस मुठभेड़ में अमर दुबे मारा गया, जबकि खुशी को आरोपी बनाकर जेल भेज दिया गया था। लंबे कानूनी संघर्ष के बाद वह फिलहाल जमानत पर बाहर हैं और अपनी नई जिंदगी की शुरुआत कर रही हैं।