कानपुर न्यूज डेस्क: लिवर की गंभीर बीमारियों से जूझ रहे कानपुर और आसपास के मरीजों के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। अब इलाज और लिवर ट्रांसप्लांट के लिए मरीजों को दिल्ली, मुंबई या दूसरे राज्यों के अस्पतालों का रुख नहीं करना पड़ेगा। कानपुर में शुरू हुई विशेष ओपीडी सेवा के जरिए पिछले छह महीनों में दो मरीजों का सफल लिवर ट्रांसप्लांट किया जा चुका है, जबकि एक अन्य मरीज का ट्रांसप्लांट जल्द होने वाला है। यह सुविधा Apollomedics Super Speciality Hospital अपोलोमेडिक्स सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल और The Gastro Liver Hospital द गैस्ट्रो लिवर हॉस्पिटल की साझा पहल के तहत शुरू की गई है।
डॉक्टरों के अनुसार हाल ही में कानपुर के 63 वर्षीय बुजुर्ग मरीज का सफल लिवर ट्रांसप्लांट किया गया, जिसमें उनके बेटे ने लिवर का हिस्सा दान किया। वहीं मैनपुरी के 56 वर्षीय मरीज को उनकी पत्नी ने नया जीवन दिया। अब कानपुर के एक और मरीज का ट्रांसप्लांट प्रस्तावित है, जिसमें उनकी पत्नी डोनर बनने जा रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर बीमारी की पहचान और स्थानीय स्तर पर शुरुआती इलाज मिलने से मरीजों की रिकवरी तेजी से हो रही है।
Abhishek Yadav डॉ. अभिषेक यादव ने बताया कि भारत में हर साल लगभग ढाई से तीन लाख लोगों की मौत लिवर सिरोसिस और उससे जुड़ी बीमारियों के कारण होती है। उन्होंने कहा कि देश की 30 से 35 प्रतिशत आबादी फैटी लिवर की समस्या से जूझ रही है। उत्तर प्रदेश में स्थिति और गंभीर है, जहां हर साल 50 से 60 हजार लोगों की मौत लिवर रोगों के कारण होती है, लेकिन पूरे राज्य में केवल 200 से 250 लिवर ट्रांसप्लांट ही हो पाते हैं। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश में फिलहाल केवल चार लिवर ट्रांसप्लांट सेंटर हैं, जबकि तमिलनाडु, महाराष्ट्र और दिल्ली-एनसीआर में इनकी संख्या कहीं अधिक है।
मरीजों की सुविधा के लिए Abhishek Yadav डॉ. अभिषेक यादव हर महीने के तीसरे बुधवार को कानपुर स्थित द गैस्ट्रो लिवर हॉस्पिटल में ओपीडी चला रहे हैं। अस्पताल के चेयरमैन V. K. Mishra डॉ. वी.के. मिश्रा ने बताया कि सही समय पर जांच और विशेषज्ञ सलाह मिलने से मरीज गंभीर स्थिति में पहुंचने से बच रहे हैं। वहीं नए एक्सप्रेसवे के शुरू होने से कानपुर और लखनऊ के बीच सफर आसान हुआ है, जिससे ट्रांसप्लांट के बाद मरीजों के फॉलो-अप और इमरजेंसी इलाज में काफी सहूलियत मिल रही है।