कानपुर न्यूज डेस्क: कानपुर के बर्रा थाने की पुलिस और साइबर टीम ने आईपीएल सट्टा बाजार के एक ऐसे गिरोह का पर्दाफाश किया है जो पुलिस की आंखों में धूल झोंकने के लिए 'चलती कैब' का सहारा लेता था। यह गिरोह इतना शातिर था कि पकड़े जाने के डर से किसी एक जगह बैठकर नहीं, बल्कि शहर की सड़कों पर घूमती हुई कारों में सट्टे का लेन-देन और ऑनलाइन गेमिंग का संचालन करता था। पुलिस ने इस मामले में एक वकील और उनके बेटे समेत आठ लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है, जबकि मास्टरमाइंड मोहित और विमल सहित 15 अन्य अभी भी फरार हैं।
जांच में सामने आया है कि इस गिरोह के तार सीधे दुबई से जुड़े हुए हैं। दुबई में बैठा मास्टरमाइंड लोटस 365, रेड्डी बुक और दुबई ईएक्सएच जैसे प्रतिबंधित गेम और सट्टे के लिए क्लोन वेबसाइट्स के जरिए पूरे देश में नेटवर्क चला रहा है। कानपुर के लिए 'ब्रांच 24' कोड आवंटित किया गया था, जिसका काम जीतने वाले खिलाड़ियों के खातों में रकम ट्रांसफर करना था। गिरोह के सदस्यों को इस काम के लिए 50 हजार से लेकर एक लाख रुपये तक का मोटा वेतन दिया जाता था।
इस हाईटेक सट्टा गिरोह की आर्थिक कुंडली खंगालने पर पुलिस के होश उड़ गए हैं। आशंका जताई जा रही है कि गिरोह के पास करीब 150 ऐसे बैंक खाते हैं, जिनमें 100 करोड़ रुपये से अधिक का संदिग्ध लेन-देन हुआ है। ये वही खाते हैं जिनमें मास्टरमाइंड साइबर ठगी से जुटाया गया पैसा ट्रांसफर कराता था। फिलहाल पुलिस ने 26 मोबाइल फोन और 52 बैंक खातों को चिह्नित किया है, जिनमें से 52 लाख रुपये फ्रीज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
फरार आरोपियों की तलाश में पुलिस की टीमें लखनऊ और प्रयागराज में छापेमारी कर रही हैं। पकड़े गए वकील के बेटे ने इस अवैध कारोबार के लिए खास तौर पर दो कारें खरीदी थीं, जिन्हें कैब के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा था ताकि मोबाइल लोकेशन लगातार बदलती रहे और सर्विलांस टीम उन्हें ट्रैक न कर पाए। बैंक खुलने के बाद खातों की पूरी जानकारी मिलने पर इस घोटाले की रकम और बढ़ सकती है। पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क के पीछे छिपे बड़े नामों और साइबर ठगी के कनेक्शन को डिकोड करने में जुटी है।