कानपुर न्यूज डेस्क: कानपुर के चर्चित अंतरराष्ट्रीय किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट में पुलिस को एक और बड़ी सफलता मिली है। 25 हजार रुपये के इनामी और 'डॉक्टर अली' के नाम से मशहूर ओटी टेक्नीशियन मुदस्सर अली सिद्दीकी ने गुरुवार को नाटकीय ढंग से एसीजेएम-6 (ACJM-6) कोर्ट में सरेंडर कर दिया। पुलिस की गिरफ्तारी से बचने के लिए मुदस्सर चेहरे पर मास्क और सिर पर टोपी लगाकर कोर्ट पहुंचा था, जहाँ से उसे 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।
मुदस्सर अली, जिसे गिरोह के सदस्य 'डॉक्टर अली' कहते थे, इस सिंडिकेट का 11वां गिरफ्तार आरोपी है। दिल्ली के द्वारका का रहने वाला मुदस्सर कोई डॉक्टर नहीं, बल्कि एक ट्रेंड ओटी टेक्नीशियन है। जांच में सामने आया है कि उसने दिल्ली में किडनी ट्रांसप्लांट की विशेष ट्रेनिंग ली थी। वह ऑपरेशन के दौरान मुख्य भूमिका निभाता था और पेट में सर्जिकल कट लगाने से लेकर किडनी शिफ्ट करने तक का काम विशेषज्ञ की तरह करता था। कानपुर में हुए 50 से अधिक अवैध ऑपरेशनों में से 30 से ज्यादा में मुदस्सर सीधे तौर पर शामिल था।
इस गिरोह का कामकाज किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं था। पुलिस के अनुसार, यह सिंडिकेट टेलीग्राम ग्रुप के जरिए संचालित होता था और शिकार फंसाने के लिए 'ब्लू व्हेल' गेम की तर्ज पर साइबर फ्रॉड का सहारा लेता था। युवाओं को पहले छोटे-छोटे टास्क देकर लालच दिया जाता था और फिर उन्हें कर्ज के जाल में फंसाकर किडनी बेचने के लिए मजबूर किया जाता था। एक मामले में बिहार के छात्र आयुष से 6 लाख में किडनी खरीदकर मरीज को 80 लाख रुपये में बेची गई थी।
किडनी रैकेट का खुलासा 29 मार्च को रावतपुर के आहूजा हॉस्पिटल और कल्याणपुर के मेडलाइफ व प्रिया हॉस्पिटल में हुई छापेमारी के बाद हुआ था। इस गिरोह में डॉ. रोहित (एनीस्थीसिया), डॉ. वैभव (डेंटिस्ट) और डॉ. अफजल (फिजीशियन) जैसे लोग शामिल थे, जिनमें से कोई भी अधिकृत सर्जन नहीं था। पुलिस अब मुदस्सर से पूछताछ कर इस रैकेट से जुड़े अन्य फरार सदस्यों और लखनऊ-दिल्ली के उन डॉक्टरों के बारे में जानकारी जुटाएगी जो इन अवैध ऑपरेशनों में सहयोग करते थे।