कानपुर न्यूज डेस्क: ऑनलाइन गेमिंग और सट्टेबाजी के जरिए ठगी करने वाले एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश हुआ है, जिसका मास्टरमाइंड दुबई में बैठकर अपने सदस्यों की हर पल मॉनिटरिंग करता है। इस गिरोह की कार्यप्रणाली इतनी शातिर है कि यदि किसी सदस्य का मोबाइल कुछ घंटों के लिए निष्क्रिय हो जाता है, तो मास्टरमाइंड तुरंत उसके फोन का सारा डेटा और आईडी डिलीट कर देता है ताकि पुलिस को कोई सबूत न मिल सके। फिलहाल, पुलिस इस गिरोह के फरार 14 अन्य सदस्यों की सरगर्मी से तलाश कर रही है।
पुलिस जांच में सामने आया कि यह नेटवर्क दो स्तरों पर काम करता है: एक गिरोह डिजिटल अरेस्ट जैसी तकनीकों से ठगी करता है, जबकि दूसरा गिरोह उस रकम को ऑनलाइन गेमिंग और सट्टेबाजी में खपाता है। ठगी की रकम को ट्रेस होने से बचाने के लिए ये अपराधी इसे 'क्रिप्टोकरेंसी' और 'यूएसडीटी' में बदल लेते हैं। इसके अलावा, खातों में आने वाली रकम का 40 प्रतिशत हिस्सा नकद में ले लिया जाता है, ताकि बैंक खाता फ्रीज होने पर भी ठगों के पास बड़ी रकम सुरक्षित रहे।
यह गिरोह सोशल मीडिया पर लुभावने विज्ञापनों के जरिए लोगों को प्रतिबंधित गेम खेलने का लालच देता था। क्लोन वेबसाइटों का इस्तेमाल कर लोगों को पंजीकरण शुल्क का दोगुना वापस करने का झांसा दिया जाता था। लोग जैसे ही इनके लिंक पर जाकर पैसे जमा करते, वे ठगी के जाल में फंस जाते थे। जीते हुए पैसों के भुगतान के लिए नोएडा, मुंबई और लखनऊ में बैठे टीम हेड अपने नेटवर्क के जरिए मैसेज भेजकर ट्रांजेक्शन मैनेज करते थे।
शहर में इस गिरोह की जड़ें काफी गहरी हैं। लगभग सात महीने पहले, सितंबर 2025 में भी इसी गिरोह के आठ सदस्यों को जेल भेजा गया था, जिसका सरगना एक बीसीए छात्र निकला था। उस समय पुलिस ने करीब 52 लाख रुपये फ्रीज कराए थे और करोड़ों के लेनदेन का पता लगाया था। पुलिस कमिश्नर के अनुसार, यह गिरोह मोहाली, बंगाल, ओडिशा और तेलंगाना जैसे राज्यों में भी सक्रिय है, जहाँ से लगातार ठगी की शिकायतें मिल रही हैं।