कानपुर न्यूज डेस्क: कानपुर में इस साल 13 मार्च को होलिका दहन और तरावीह की नमाज एक साथ होने के चलते प्रशासन ने सख्त सुरक्षा व्यवस्था लागू करने का फैसला किया है। डीएम जितेंद्र प्रताप सिंह ने अधिकारियों के साथ बैठक कर 100 मस्जिदों की पहचान की है, जिनके आसपास होलिका दहन का आयोजन होगा। प्रशासन ने यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं कि सभी धार्मिक कार्यक्रम शांतिपूर्वक संपन्न हों। इसके अलावा, रावतपुर रामलला मंदिर से मसवानपुर जामा मस्जिद तक निकलने वाले जुलूस के दौरान आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया गया है।
होली की रात शहरभर में करीब 250 मस्जिदों में तरावीह की नमाज होगी, जिसे देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद की जा रही है। कमिश्नरेट पुलिस ड्रोन के जरिए निगरानी करेगी, और डीएम ने बिजली, पानी, स्वास्थ्य और सुरक्षा की पुख्ता व्यवस्थाओं के आदेश दिए हैं। इसके अलावा, होली के दौरान तेज आवाज में बजने वाले साउंड सिस्टम पर भी प्रशासन की सख्त नजर रहेगी। किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए कोतवाली, रावतपुर और बाबूपुरवा थानों में कंट्रोल रूम स्थापित किए जा रहे हैं।
कानपुर में पहले भी होली के दौरान विवाद हो चुके हैं, जिनसे प्रशासन ने सबक लिया है। 2019 में महाराजपुर के बैजाखेड़ा में रंग डालने को लेकर विवाद हुआ था, जबकि 2013 में नरवल क्षेत्र में झगड़ा हुआ था। मसवानपुर में पहले ‘गुड़िया-गुड्डा’ का जुलूस निकाला जाता था, जिसे जनता के विरोध के बाद प्रतिबंधित कर दिया गया था। वहीं, नजीराबाद के रंजीत नगर और काकादेव इलाके में होली आयोजन को लेकर असमंजस की स्थिति बनी रहती है, जिसे देखते हुए प्रशासन विशेष सतर्कता बरत रहा है।