कानपुर न्यूज डेस्क: केडीए (कानपुर विकास प्राधिकरण) से नक्शा पास कराना अब पहले से ज्यादा महंगा हो गया है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद केडीए से आवंटित या आराजी जमीन पर मकान बनाने वालों को अतिरिक्त खर्च उठाना होगा। शहर के साथ ही बिठूर और अकबरपुर-माती में भी नक्शा पास कराने के लिए पांच प्रतिशत ज्यादा राशि चुकानी होगी। बीते दो वर्षों में यह शुल्क 10 प्रतिशत तक बढ़ चुका है, जिससे अवैध निर्माण का शमन भी महंगा हो गया है। वित्तीय वर्ष 2022-23 में शहर का विकास शुल्क प्रति वर्गमीटर 2250 रुपये था, जो अब बढ़कर 2473 रुपये प्रति वर्गमीटर हो गया है।
बिठूर और अकबरपुर में भी विकास शुल्क में वृद्धि हुई है। वित्तीय वर्ष 2022-23 में प्रति वर्गमीटर शुल्क 525 रुपये था, जो पहले 585 रुपये हुआ और अब चालू वित्तीय वर्ष में 610 रुपये हो गया है। इस तरह, दो वर्षों में 85 रुपये प्रति वर्गमीटर की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। केडीए से आवंटित भूखंडों या निजी बिल्डरों से खरीदे गए प्लॉट का नक्शा पास कराना अब और महंगा पड़ेगा। खासकर उन भूखंडों पर, जिनका सब-डिवीजन हो चुका है, विकास शुल्क लागू किया गया है।
शुल्क बढ़ने के बावजूद कुछ राहत भी दी गई है। आवासीय मानचित्र शुल्क को 6.35 रुपये प्रति वर्गमीटर से घटाकर 5 रुपये प्रति वर्गमीटर कर दिया गया है। इसी तरह, निरीक्षण शुल्क भी 24.95 रुपये प्रति वर्गमीटर से घटाकर 20 रुपये प्रति वर्गमीटर कर दिया गया है। ग्रुप हाउसिंग प्रोजेक्ट्स में मानचित्र शुल्क पहले 18.75 रुपये प्रति वर्गमीटर था, जिसे अब 15 रुपये प्रति वर्गमीटर कर दिया गया है। वहीं, व्यावसायिक मानचित्र शुल्क भी 37.45 रुपये से घटाकर 30 रुपये प्रति वर्गमीटर किया गया है।
शमन शुल्क की नई दरें इस तरह लागू होंगी – व्यावसायिक निर्माण में आवासीय दर का दो गुना, कार्यालय निर्माण में 1.5 गुना, औद्योगिक निर्माण में 0.40 गुना और अन्य श्रेणियों में 0.50 गुना शुल्क देना होगा। इसके अलावा, मलबा शुल्क भी बढ़ा दिया गया है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में यह 49.85 रुपये प्रति वर्गमीटर था, जो अब 2025-26 में बढ़कर 52 रुपये प्रति वर्गमीटर हो गया है।
केडीए सचिव अभय पांडेय के अनुसार, एक अप्रैल से नए नक्शे पास कराने के लिए आवंटियों को नई दरों के अनुसार शुल्क जमा करना होगा। हर साल विभिन्न श्रेणियों के लगभग एक हजार नक्शे पास किए जाते हैं, और इस बदलाव से नक्शा पास कराने की प्रक्रिया में अतिरिक्त आर्थिक भार पड़ेगा।