कानपुर न्यूज डेस्क: **नवजातों के स्वास्थ्य की निगरानी के लिए मेडिकल कॉलेज ने एक अनोखी पहल की है। अब सिर्फ एक छोटी सी चिप के जरिए शिशुओं के शरीर का तापमान, धड़कन और पल्स रेट की निगरानी की जा सकेगी। इसके लिए जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज ने आईआईटी के स्टार्टअप मेडेंट्रिक के साथ करार किया है। यह चिप, जिसे "नेओहेल्थ" नाम दिया गया है, नवजातों के स्वास्थ्य पर नजर रखने में मदद करेगी और किसी भी गंभीर बीमारी के लक्षणों का पहले से पता लगाने में सहायक होगी। स्टार्टअप ने इस चिप के निर्माण की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
**बाल रोग विभाग में इस चिप को बच्चों की कलाई या सीने पर 24 घंटे के लिए लगाया जाएगा। यह न केवल उनके तापमान और पल्स रेट की जानकारी देगा, बल्कि सांस की गति, कराहने की प्रवृत्ति और एसपीओ2 स्तर की भी निगरानी करेगा। इससे डॉक्टर किसी भी संभावित गंभीर बैक्टीरियल इन्फेक्शन (पीएसबीआई) का पहले से अनुमान लगा सकेंगे और समय रहते इलाज किया जा सकेगा। विशेषज्ञों के अनुसार, हर 100 में से 10 नवजात शिशुओं को यह समस्या होती है, लेकिन 80% मामलों में माता-पिता को इसकी जानकारी नहीं होती, जिससे स्थिति गंभीर हो जाती है।
**डॉक्टरों का कहना है कि पीएसबीआई के लक्षणों में तेज सांस, बुखार, शरीर का ठंडा पड़ना, दूध कम पीना और सुस्ती शामिल हैं। इस चिप से नवजात के स्वास्थ्य की हर जानकारी तुरंत डॉक्टरों तक पहुंच जाएगी, जिससे सही समय पर उचित चिकित्सा प्रदान की जा सकेगी। इस प्रोजेक्ट के लिए डिपार्टमेंट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी ने सात लाख रुपये का बजट स्वीकृत किया है, जिससे इस तकनीक को जल्द ही बाजार में लाने की योजना है। यह चिप वाटरप्रूफ होगी और इसे नहाने के समय निकाला भी जा सकता है।
एक बार बाजार में उपलब्ध होने के बाद, अभिभावक इसे खरीदकर अपने बच्चों पर आसानी से लगा सकेंगे। इसे इस्तेमाल करने के लिए माता-पिता को अपना नाम, पता और मोबाइल नंबर पंजीकृत कराना होगा। जैसे ही यह चिप बच्चे के शरीर से जोड़ी जाएगी, उसकी पूरी जानकारी बाल रोग विभाग तक पहुंच जाएगी। अगर बच्चे की स्थिति बिगड़ने की आशंका होगी, तो अस्पताल से तुरंत माता-पिता को सूचित किया जाएगा और समय रहते उपचार की सलाह दी जाएगी।